ओरिजिनल अशोक स्तंभ उत्तर प्रदेश के सारनाथ के म्यूजियम में रखा है. माना जाता है कि इसे 250 ईसा पूर्व में स्थापित किया गया था.

1900 में जर्मनी के सिविल इंजीनियर फ्रेडरिक ऑस्कर ओएर्टेल ने सारनाथ के आसपास खुदाई शुरू की थी.

खुदाई करते समय 1905 में ये अशोक स्तंभ मिला था. आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के एक दस्तावेज के मुताबिक, इस समय अशोक स्तंभ की ऊंचाई 7 फीट 6 इंच है.

लेकिन माना जाता है कि इसकी ऊंचाई 55 फीट रही होगी और समय के साथ इसमें टूट-फूट हुई होगी.

खुदाई करने पर पता चला था कि इस अशोक स्तंभ को 8 फीट चौड़े और 6 फीट लंबे पत्थर के एक बड़े से आकार के चबूतरे पर स्थापित किया गया था.

इस स्तंभ के पिछले हिस्से में तत्कालीन पाली भाषा और ब्राह्मी लिपि में अशोक के लेख छपे हुए हैं.

इस स्तंभ पर अशोक के लेख के अलावा दो और लेख छपे हैं. इनमें से एक अश्वघोष नाम के किसी राजा के शासनकाल का है. जबकि, दूसरा लेख चौथी शताब्दी में लिखा हुआ माना जाता है.

सम्राट अशोक को दुनिया के सबसे महान राजाओं में गिना जाता है. 270 ईसा पूर्व में वो राजा बन गए थे. लेकिन, कलिंग के युद्ध ने उन्हें बदल दिया था. इस युद्ध के बाद उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया

ऐसे कई स्‍तंभ अशोक ने भारतीय उपमहाद्वीप में फैले अपने साम्राज्‍य में कई जगह लगवाए थे, जिनमें से सांची का स्‍तंभ प्रमुख है।

कई चीनी यात्रियों के विवरणों में इन स्‍तंभों का जिक्र मिलता है। सारनाथ के स्‍तंभ का भी ब्‍योरा दिया गया था मगर 20वीं सदी की शुरुआत तक इसे खोजा नहीं जा सका था।

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