सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार हेतु एवं तत्कालीन समाज में सन्देश देने के लिए अपने अभिलेख- विभिन्न स्तंभ, शिला, गुफाओं आदि में लिखवाए। 

सम्राट अशोक के लगभग 40 अभिलेख प्राप्त हुए हैं। अशोक के अभिलेखों को विद्वानों ने पांच भागों में वर्गीकृत किया।

इन शिलालेख की भाषा प्राकृत तथा लिपि ब्राह्मी है. अशोक ने इन्हें “धम्मलिपि” कहा है. पाकिस्तान में मिले अभिलेख खरोष्ठी लिपि में हैं.  आइये जानते है सम्राट अशोक के ८ प्रमुख अभिलेख के बारे में। 

यहाँ एक विशाल शिला जो 24 फीट लम्बी, दस फीट चौड़ी और दस फीट मोटी है, पर 12वें लेख को छोड़कर शेष सभी खुदे हुए हैं. 12वाँ लेख 50 गज दूर तक एक पृथक शिला पर खुदा है.

शाहबाजगढ़ी अभिलेख -मर्दान (पाकिस्तान)

यह स्थान पाकिस्तान के ख्याबर पख्तूनख्वा में है. यहाँ पहले के 12 लेख मिले हैं. 13वें और 14वें लेख नहीं मिले हैं.

मानसेरा अभिलेख (पाकिस्तान)

देहरादून जिले में एक विशाल शीले पर अशोक के 14 लेख उत्कीर्ण हैं.  

कालसी अभिलेख - देहरादून 

यह काठियावाड़ (गुजरात) की प्राचीन राजधानी थी. यहाँ एक विशाल शिला पर 14 लेख मिले हैं. 

गिरनार  अभिलेख -जूनागढ़ - गुजरात

यह उड़ीसा में भुवनेश्वर (जिला पुरी) से सात मील की दूरी पर है. यहाँ अश्वस्तम्भ नामक एक शिला है जिस पर अशोक के लेख उत्कीर्ण हैं. 14 में से 11, 12 और 13 नहीं मिले हैं. 

धौली अभिलेख- भुबनेश्वर - ओडिसा

यह स्थान ओड़िसा के गंजाम जिले में है. यहाँ भी 11, 12, 13 संख्या के लेख नहीं मिले हैं. 

जौगढ़ अभिलेख- गंजाम - ओड़िसा

यह स्थान मुंबई के ठाणे जिले में है. प्राचीन शूपरिक नगरी यहीं पर थी. यहाँ 8वें शिलालेख का आठवाँ भाग अविकल रूप में मिला है. 

सोपारा अभिलेख - मुंबई- (महाराष्ट्र)

येर्रागुड़ी अभिलेख- कर्नूल - आंध्र प्रदेश